name='verify-cj'/> चलते चलते: अतुल्य भारत

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Monday 17 March 2008

अतुल्य भारत


स्कारलेट मर्डर केस की रिपोर्टिंग ब्रिटिश मीडिया ने जबरदस्त तरीके से की, पिछले दो हफ्तों में लगभग हर बड़े अख़बार के पहले पेज पर रहा है ये केस। सनसनी फैलाने के लिए मशहूर ब्रिटिश टॅब्लाइड्स ने इस खबर को जम कर उछाला। कुछ ने गोआ सरकार को दोषी बताया तो कुछ ने स्कारलेट के अभिभावकों को। क्या इस केस का असर भारत के इनक्रेडिबल इंडिया कैंपेन पर पड़ेगा? पिछले कुछ सालों में भारत मे आने वाले विदेशी सैलानियों की संख्या मे काफ़ी इज़ाफा हुआ है। कुछ तो है गोआ मे जो सैलानियों को लगातार अपनी ओर आकर्षित करता है। अकेले 2007 के आकड़ों को देखे तो कुल 2.2 मिलियन सैलानियों नें गोआ भ्रमण किया। 1970 के दशक मे गोआ हिप्पी कल्चर के केंद्र के रूप मे उभरा, समय के साथ इस कल्चर को अपनाने वाले तो कम हुए पर गोआ की पहचान जस की तस रह गयी। आज भी विदेशी सैलानी इसी चाह मे गोआ चले आते है। अब सवाल ये उठता है की सैलानियों को गोआ और देश के अन्य कोनों मे सुरक्षा कैसे प्रदान की जाए।अगर जवाब जल्दी नही खोजा गया तो शायद इंडिया इनक्रेडिबल नही रह जाएगा और छोकरे अपना काम करते रहेंगें। विदेशी मीडिया की माने तो भारत सुरक्षित नही है। गोआ मे हुई एक घटना को पैमाना बनाकर पूरे भारत को नाप दिया गया। कार्यालय मे जब एक सहयोगी ब्रिटिश पत्रकार ने भी चिंता जताई तो हमनें कहा विश्व के हर कोने मे ऐसी घटना होती रहती है। हालाँकि इस तर्क को सफ़ाई के रूप में नही लिया जा सकता है। यक़ीनन स्कारलेट की जान जाने की ज़िम्मेदार गोआ सरकार और पोलीस है। आशा यही है की पोलीस और सरकारें कुछ सख़्त कदम उठाएँगी। कुछ बदमिज़ाज़ भारतीयों के कारण पूरे देश को शर्मसार नही होना पड़ेगा।

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