name='verify-cj'/> चलते चलते: एक पत्रकार की कहानी

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Saturday 22 March 2008

एक पत्रकार की कहानी





हम भारतीय मीडिया की आलोचना या तारीफ (गाहे बगाहे) करने में मगन रहते है। मेरी कोशिश है कुछ ऐसी कहानियों को सामने लाने की जो प्रेरणास्त्रोत हैं। इसी कड़ी में आज बात करते है कनेडियन क्राइम रिपोर्टर Michel Auger की। माइकल ने क्राइम रिपोर्टिंग के नये कीर्तिमान स्थापित किए है। ९० के दशक मे कनाडा में क्राइम अपने चरम पर था और इसी समय माइकल ने Canada Le Journal de Montreal अख़बार मे क्राइम रिपोर्टिंग को नये आयाम दिए। ख़ासकर बाइकर गिरोहों का आतंक सबसे ज़्यादा था। माइकल ने लगातार इनके खिलाफ रिपोर्टिंग की और कइयों का पर्दाफाश किया। ज़ाहिर है कई दुश्मन भी बनाए। रोज़ की तरह काम से लौट रहे माइकल को १३ सितंबर, २००० को गोलियों से भून दिया गया। ६ गोलियाँ शरीर मे धसने के बाद भी माइकल ने अपने स्टाफ को रिपोर्ट किया और घटना की जानकारी दी। शायद उन्हे इस खबर की महत्ता का अंदेशा रहा होगा। ऐसी जीवटता वाले इंसान बेहद कम होते है। चार महीने तक अस्पताल मे इलाज कराने के बाद माइकल अपने डेस्क पर वापस थे और जो उन्होने कहा वो मैं यहा चिपका रहा हू। "I realised I had to go back to work, that it wouldn't be a crminal who decided the date of my retirement." इस घटना के बाद माइकल ने अपने परिवार से वादा किया की वो फिर से क्राइम बीट पर वापस नही जाएगें पर एक हफ्ते बाद माइकल वही कर रहे थे जिसके लिए उन्हे जाना जाता है। माइकल ने क्राइम रिपोर्टिंग और इस घटने के उपर The biker who Shot Me शीर्षक से एक किताब लिखी है। मैं इसे हर पत्रकार को पढ़ने की सलाह दूँगा। माइकल ने अपनी पुस्तक मे कहा है की क्राइम रिपोर्टिंग वार रिपोर्टिंग से भी कठिन है क्योंकि ये कभी ख़तम नही होती। माइकल सहित सारे क्राइम रिपोर्टर्स के ज़ज़्बे को सलाम।
Michel Auger के बारे में और जानने के लिए ये लिंक देखें-- http://www.cpj.org/attacks00/americas00/Canada.html

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