name='verify-cj'/> चलते चलते: होली विद कुरकुरे एंड पेप्सी

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Saturday 22 March 2008

होली विद कुरकुरे एंड पेप्सी


जौन सा भी चैनल देखो होली है, ब्लॉग देखो तो होली है। हमे लगा हमही सबसे अभागे है, सब होलिया रहे है और हम इडली डोसा चबा रहे है। हमारे अपने शेट्टी साहब सुबह सुबह मिल गये और दे डाली होली की बधाई। हमने स्वीकारी और आगे बढ़ गये। सुबह से कई ब्लॉग पढ़े , सब पे होली की कोई ना कोई कहानी चल रही है। हमने कहा असल में ना सही, ब्लॉग पे ही होलिया लेते है। पर कुछ सूझ नही रहा था की क्या लिखे। भला हो शेट्टी साहब का की हमे पोस्ट लिखने का कारण मिल गया। १ बजे के आस पास वो बोले होली तो आपका बड़ा त्योहार होता है। हमे कोफ़्त हो रही है की आप अकेले बैठे हैं। जाने कहा से आज इस उत्तर भारतीय के उपर उन्हे प्यार आया और बोले चलिए आपको होली के एक कार्यक्रम में ले चलते है। हम चौंक गये, मंगलूर में होली? खैर गये। नज़ारा देखिए, हमारे कुछ सहियोगी (सभी दक्षिण भारतीय और कुछ विदेशी) जमा है होलियाने। हमने कहा यार हमे तो किसी ने बताया नही की कोई कार्यक्रम है। पता चला सुबह से बुद्धू बक्सा देखते देखते शेट्टी साहब को लगा की कुछ करना चाहिए। तो, ये कार्यक्रम उनके दिमाग़ की उपज थी। किया क्या जाय किसी को नही मालूम। हमने कहा चलो हम ही पहल करते हैं। ये क्या, ना तो कीचड़ है, ना रंग से भरा कोई टैंक, न कोई बालीवुड गाना, ना कबीरा। अब भैया इन सबके बिना तो कभी होली खेले नही थे। का करते, कुछ गुलाल उठाया और सबको लगा दिया। अब का करे, तभी किसी को अड़ीया आया गाना गाते है। शुरू हुआ, गाना वो भी अँग्रेज़ी। हम भी सोचते रहे, ई कौन सा होली है भाई। गाना वाना ख़तम हुआ, हम सोचे शायद अब भांग लाई जाएगी। ई का, कुरकुरे का पैकेट और पेप्सी निकली। पेप्सी हाथ मे लिए याद आ गयी लोकनाथ की कपड़ा फाड़ होली की, घर की बनी गुझिया, बड़े हनुमान जी के पास मिलने वाली भांग की। कार्यक्रम ख़त्म हुआ और चल पड़े घर की ओर। कुछ गर्व था की हम भी कह सकते है की एक बार होली सभ्यता से मनाई थी। पर होली का मतलब क्या असभ्य होना होता है? पता नही काफ़ी लोंग तो कहते है, पर हमको तो उही इलाहाबादी वाली होली ही पसंद है। कोई असभ्य कहे तो ठेंगे से। अंत मे सबको होली की शुभकामनाएँ और हमारे सभी सहियोगियो को कुरकुरे वाली होली के लिए धन्यवाद।

3 comments:

पंकज अवधिया Pankaj Oudhia said...

पहले तो आपको होली की हार्दिक शुभकामनाए। आपके अनुभव को पढकर शक हो रहा है कि यह शहर भारत मे ही है या बाहर। शेट्टी साहब को आप अगली बार असली होली के रंग दिखाइयेगा। जीवन भर आपका अहसान मानेगे। :)

swati said...

aaj pehli baar aapka blog padha.rochak hai.

preks said...

Holi is something which everyone just loves and i understand completely how u must have felt when u had to adjust with Pepsi and kurkare. Agle saal hum shetty saab ko humari holi dekha dege kya bolta hai vikas????