name='verify-cj'/> चलते चलते: बी पी ओ और शेट्टी साहब

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Tuesday 11 March 2008

बी पी ओ और शेट्टी साहब

आज सुबह की सैर के बाद शेट्टी साहब के मिज़ाज़ कुछ बदले हुए नज़र आ रहे थे। हमने गुस्ताख़ी माफ़ कहते हुए पूछ ही लिया, क्या हुआ कुछ मूड खराब है क्या? इतना सुनते ही शेट्टी साहब बरस पड़े, बोले आमा यार आजकल की पीढ़ी को हो क्या गया है, सब सब के सब नलायक है। हमने कहा बात क्या हुई ये तो बताओ। पता चला पार्क मे आज कुछ लड़कों से बहस हो गयी थी, शेट्टी साहब गुस्से से बोले, पता है पत्रकार महोदय ये नौजवान समझते है की बिना बीपीओ और टेक कंपनियों के मंगलोर पिछड़ा हुआ था। बिना मैकडोनल्ड और पिज़्ज़ा हट के भी कोई शहर होता है क्या? कुछ नौजवान आज पार्क मे इसी मुद्दे पर बात कर रहे थे और अपने शेट्टी मियाँ आदत के अनुसार कूद गये बीच मे बहस करने, और जब नयी उमर के लड़कों ने पटखनी दे दी तो तुनक कर घर वापस आ गये। बेचारी बीवी को उनके कोप का शिकार बनना पड़ता पर आज निशाने पर हम थे। बोले आप मीडिया वाले तो कुछ मत बोलिए, कभी रायचुर या गुलबर्गा की खबरें छापते हो? किसानों का क्या हाल है, इससे तुम्हे क्या मतलब बस मंगलोर और बंगलोर का नगाड़ा पिटो। मैने कहा, सर ऐसा नही है आज का मीडिया बड़ा जागरूक है, गुस्से में लाल होकर बोले क्या खाक जागरूक हैं तुम्हारा मीडिया, नाग नागिन की कहानी दिखाते रहते हो। हमने सोचा की वो मीडिया की और भद्द पिटें बात घुमा दी जाए। हमने कहा क्या ग़लत है, अगर नौजवानों को रोज़गार मिल रहा है, हमे बी पी ओ को और प्रोत्साहन देना चाहिए। जल्द ही पता चल गया की फिर से निशाना ग़लत लगा है, अबकी बार गुस्से से सतरंगी होकर बोले, तुम्हे क्या पता की वो सारे पुराने सिनेमा हाल और सागर कैफ़े की कीमत जिनकी जगह मालों और ब पी ओ ने ले ली है, कभी वहाँ कन्नड़ साहित्यकारों और बुद्धजिवियों की मंडली लगा करती थी। पुरानें दिनों की याद ने शायद शेट्टी साहब को कुछ ठंडा कर दिया था, एक लंबी सांस ली और बोले हम कर भी क्या सकते है, बस तमाशबीन बने रहेंगें। मैने सोचा मामला गरम हो रहा है तो तो फिर कुछ नयी बात उठाई जाए। यूँही पूछा क्या खबर है आज अख़बार में? आज दिन ही खराब था, फिर से गुस्से में बोले, वही राज ठाकरे की पार्टी का तमाशा, इसको भगाओ उसको भागाओ, अरे कोई बी पी ओ को भागने का तरीका तो बताए।इससे पहले की वो मेरी तरफ निशाना साधते मैने कहा कुछ काम है आप से शाम को मिलूँगा।

1 comment:

राज भाटिय़ा said...

विकास लिखा तो आप ने बिलकुल सही हे, लेकिन हम भी आप के शेट्टी साहब कर भी क्या सकते है,